काश, वो दिन भी आता...

मैं भी कभी खुश रह पता, धूप-छांव में भी खिलखिलाता। होती न मुझको भी कोई टेंशन काश, ऐसा दिन भी कोई आता... मैं जो चाहूं कर पाऊं चैन से जरा आराम फरमाऊं। चारों तरफ हो स्वर्ग सा माहौल, नित नए कदम रोज बढ़ाता। काश, ऐसा दिन भी कोई आता... हो झोली में ढेरों खुशियां, उमंग से भरा हो नवजीवन मेरा। दुनिया को मैं कुछ समझाता , काश ऐसा दिन भी कोई आता... मेरे मन की अंतर ज्वाला में, रोज उठे एक विचार अनोखा। कर सकूं उपकार सभी का, काश ऐसा दिन भी कोई आता...

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