ख्वाब और सच्चाई
एक बार रात को हम सैर पर निकल पडे,
उस सैर में हम जिंदगी से आगे चल पड़े
रस्ते में हमें एक इंसान मिला,
सुंदर और जवान मिला
हमने पूछा,
कौन हो तुम,
वो बोला-
तुम मुझे नही जानते ,
मैं ही लोगो की जिंदगी को रंगीन बनता हु,
बैठे-बैठे ही उन्हें दूर-दराज की सैर करता हु
मेरी वजह से ही
गरीबी और अमीरी के बीच की खाई दूर होती है ,
मेरी वजह से ही जिंदगी भरपूर होती ही,
मेरी वजह से ही गरीब आदमी सपने सजोता है ,
और भूखा रहने के बावजूद चैन से सोता है,
मेरी वजह से ही जिंदगी में रुबाब होता है
असल में मेरा नाम ही ख्वाब होता है
मैंने कहा-
तुम ही ख्वाब हो ,
जो आदमी को पागल बनता है ,
और गरीब आदमी को भी भरपेट खाना मिलने का झुटा सपना दिखलाता है
ख्वाब बोला मैं झूठा ही सही,
पर तुम्हारी सच्चाई से तो अच्छा हु
तुम्हारी सच्चाई-
गरीबो और अमीरों के बीच अन्तर बनती है ,
जबकि मैं गरीबो और अमीरों को जोड़ता हु ,
झूठे ख्वाब ही दिखलाता हु ,
पर गरीबो के चेहरे पर कुछ पल के लिए ही सही ,
हसी तो छोड़ता हु
उस सैर में हम जिंदगी से आगे चल पड़े
रस्ते में हमें एक इंसान मिला,
सुंदर और जवान मिला
हमने पूछा,
कौन हो तुम,
वो बोला-
तुम मुझे नही जानते ,
मैं ही लोगो की जिंदगी को रंगीन बनता हु,
बैठे-बैठे ही उन्हें दूर-दराज की सैर करता हु
मेरी वजह से ही
गरीबी और अमीरी के बीच की खाई दूर होती है ,
मेरी वजह से ही जिंदगी भरपूर होती ही,
मेरी वजह से ही गरीब आदमी सपने सजोता है ,
और भूखा रहने के बावजूद चैन से सोता है,
मेरी वजह से ही जिंदगी में रुबाब होता है
असल में मेरा नाम ही ख्वाब होता है
मैंने कहा-
तुम ही ख्वाब हो ,
जो आदमी को पागल बनता है ,
और गरीब आदमी को भी भरपेट खाना मिलने का झुटा सपना दिखलाता है
ख्वाब बोला मैं झूठा ही सही,
पर तुम्हारी सच्चाई से तो अच्छा हु
तुम्हारी सच्चाई-
गरीबो और अमीरों के बीच अन्तर बनती है ,
जबकि मैं गरीबो और अमीरों को जोड़ता हु ,
झूठे ख्वाब ही दिखलाता हु ,
पर गरीबो के चेहरे पर कुछ पल के लिए ही सही ,
हसी तो छोड़ता हु
Bahut khub.Likhte rahiye.
ReplyDelete