शर्म आती है... सचमुच, शर्म आती है...
क्या कहूं... जब देश का कृषि, खाद्य आपूर्ति मंत्री किसी ठाकरे के दरबार पर जाकर मत्था टेक आता है... न न... किसानों की आत्महत्या या महंगाई रोकने के लिए नहीं (यह वे कर भी नहीं सकते), बल्कि आईपीएल में विदेशी खिलाड़ी खेल सकें, इसलिए... शर्म आती है...एक ऐसे शहर में रहता हूं, जहां सरकार नाम की शायद कोई चीज़ नहीं... एक का ही राज है - ठाकरे... क्या आम, क्या ख़ास, सबको अमन से रहने, काम करने के लिए ठाकरे का ठप्पा चाहिए, वरना देश का एक तथाकथित जिम्मेदार मंत्री, पुलिस कमिश्नर या अपनी पार्टी के गृहमंत्री तक फरियाद नहीं ले जाता... शर्म आती है...समझ नहीं आता, आखिर ऐसा क्यों है.... हर इजाज़त को 'मातोश्री' तक एड़ियां रगड़ने की दरकार क्यों होती है... क्या शर्मनाक बयान है - पहले बाल ठाकरे को प्रेजेंटेशन दिया जाएगा, और फिर अगर उन्हें अच्छा लगा, तब मुंबई में आईपीएल मैच खेले जाएंगे... शर्म आती है...कौन हैं ठाकरे... आज तक उन्होंने कोई नगर निगम चुनाव तक नहीं लड़ा... वह चुने हुए जनप्रतिनिधि नहीं... फिर उन्हें इतनी इज्ज़त बख्शने का मतलब... क्या समाज और देश के लिए उन्होंने कोई ऐसा काम कर दिया है, जिसकी हमे...