सूरज हैरान था, कहां गईं किलकारियां

इलाहाबाद [हरिशंकर मिश्र]। कुंडा तहसील के 33 गांवों में शुक्रवार की सुबह जब सूरज निकला तो उदास था। इन गांवों से रोज उठने वाली किलकारियां गायब थीं। गांव के गलियारे सूने थे और जिंदगी का नामलेवा तक न नजर आ रहा था। न घरों के चूल्हे से धुंआ उठता दिखाई दिया न चरने के लिए जानवर निकाले गये। हर गांव में किसी न किसी घर से मातम के सुर थे जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा फट सकता था।
मोहमिदपुर में पार्वती के घर सुबह से ही पूरे गांव का जमावड़ा था। इस घर पर ईश्वर ने वज्रपात किया था। पार्वती की तो मौत हुई ही थी। साथ में दस साल का बेटा अभय भी मौत की भेंट हुआ था। इसी घर की बेटी थी कलावती जिसकी शादी झाझामऊ में हुई थी। वह अपने आठ साल के बेटे के साथ मायके आयी थी। दैव की मार, इन दोनों की भी मौत इस हादसे में हो गई। एक ही घर से चार-चार लाशें देख लोगों की छाती फटी जाती थी। अभय और सचिन दोनों एक ही स्कूल में कक्षा तीन के छात्र थे। साथ ही खेलते-कूदते थे और पूरे गांव की आंखों का तारा थे। इसी तरह बरई गांव में मथुरा के घर पर मातम छाया हुआ था। यहां दो बहनों 11 साल की सरिता और 12 साल की सविता की मौत हुई थी। इन दोनों बहनों में बड़ा अपनापन था। इनकी अठखेलियों का जगह घर में सियापा छाया हुआ था। सबसे बुरा हाल तो मवई गांव के लोगों का था। इस गांव के निवासी राम बहादुर निर्मल ने तीन बेटियां खोयी थीं। राम बहादुर की हालत विक्षिप्तों जैसी थी। एक बड़ी बेटी मंजू के साथ छह साल की मुस्कान और बारह साल की रवीना के बिना कैसे पूरा परिवार रहेगा, यह चिंता सबको साल रही थी। राम बहादुर के भाई का लड़का बलबीर भी हादसे का शिकार हो गया। एक ही घर में कफन में लिपटी चार लाशें पड़ी थीं। महिलाएं पछाड़ खाकर गिर पड़ रही थीं। दोपहर बाद जब बच्चों को अंत्येष्टि के लिए ले जाया गया तो पूरा गांव की आंखों से झर-झर आंसू गिर रहे थे। इटौरा गांव में भी शोकगीत चल रहा था। यहां बारह साल की प्रीति और छह साल के सुभाष की मौत ने सबके चेहरे से आभा छीन ली थी। शैलवारा गांव की लक्ष्मी भी हंसते-खेलते प्रसाद लेने रवाना हुई थी। अब उसका चेहरा भी गांववाले नहीं देख पायेंगे। इसी तरह खेमई पुर गांव की सुगना का चेहरा फूल जैसा था। वह लोगों के पैरों तले कुचल गया। इस गांव के लोग उसे गठरी में भरकर लाये। गांव के पास ही जब उसकी अंत्येष्टि की गई तो परिजनों के रुदन से आकाश दहल उठा।

Comments

Popular posts from this blog

जीवन का सार

THOUGHT

HOLI