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क्रिकेट को दौलत की कैद में मत डालिए

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के 37वें जन्मदिन पर किसी भी क्रिकेटप्रेमी का भावुक हो जाना लाजमी है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने पेशे को नई ऊंचाइयां देते हैं और लोग उनमें नए युग का प्रतिबिंब देखने लगते हैं। सचिन और अमिताभ ऐसी ही शख्सियत हैं। जाहिर है जब पूरा देश यह कामना कर रहा है कि सचिन लंबी उम्र जीयें और अपने कीर्तिमानों के पहाड़ को इसी तरह बढ़ाते रहें, तब क्रिकेट की दशा, दिशा के बारे में भी कई सवाल मन में उठते हैं। आईपीएल को लेकर जो कुछ भी हो रहा है वह किसी भी खेल को पूरी तरह झकझोरता है। यह ठीक है, हम बाजारू अर्थव्यवस्था में जी रहे हैं। यह ऐसा दौर है, जहां हर चीज दौलत के तराजू पर तौली जाती है और इसीलिए नैतिकता को भी प्रबंधकीय फंडे में ढाला जा रहा है। जहां जुनून का मतलब अपनी निजी सफलता है और जितना हो सके उतना चुराकर इन्कम टैक्स चुका देने में देशभक्‍ति। आज कोई भी खिलाड़ी यह नहीं कहता कि शतक मारते समय मेरे दिमाग में देश घूम रहा था। वह गए शुक्रवार की शाम थी। मौका था, हिन्दुस्तान टाइम्स के चंडीगढ़ संस्करण की दसवीं सालगिरह का। तमाम लोग खुशी के इस मौके पर इकठ्ठा थे। वहीं उड़नसिख मिल्खा सिं...